अमृतवाणियां


इसके अलावा अनेक अमृत वाणियां है
         १. सगा के जबर बैरी होथे सगा होथे ।
२. सबर के फल मीठा होथे ।
         आजकल सतनाम को एक वर्ग, एक समाज की विशेष पहचान बनाकर जाना जाने लगा है जो निर्मूल है । बाबाजी के अनुसार ''सतनाम घट घट में समाये है की व्याखया व्यापक है, किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं है । सतनाम पूरी सृष्टि के लिए है, मानव, जीव जन्तु के लिए है । ब्रम्हांड जिसमें अनेक सूरज, असंखय ग्रह, उपग्रह विद्यमान है । सूरज का ताप हजारों वर्षों से कम नहीं हो रहा है । सभी ग्रह सूरज के चारों ओर घूम रहे हैं, उनकी गति में कमी नहीं आयी है, यही सत्‌ है और जो सत्‌ का आभास कराता वह सतनाम है इसलिए कहा जाता है सतनाम एक धूरी है जिससे सबको होकर गुजरना है और यह कार्य सत्‌ पर आधारित है सतनाम से जाना जा सकता है । ग्रहों का सूरज के चारों ओर घूमना, चन्द्रमा का पृथ्वी के चारों ओर घूमना उनकी प्रवृत्ति बन गई है यही सत्‌ है । सत्‌ मिटाया नहीं जा सकता, सत्‌ को झूठलाया नहीं जा सकता, सत्‌ अकाट्‌य है ।
         बाबाजी ने अनेक उपदेश अनेक अमृत वाणियों जनमानस की कुरितियों को दूर करने के लिए कही है । समय की मांग एवं मानव के उत्पीड़न को दूर करने के लिए बाबाजी जन जन में समा गये थे । इसलिये बाबाजी ने जनमानस को सात्विक आचार विचार पैदा करने के लिए उपदेश दिये ।

All the content of the website is not against any religion ,race or community , also we are not subjected to hurt any body by content, if you feel any type of changes please write to us "contact@gurughasidas.org"" or gurughasidas@gmail.com if any mistakes by our side we apologize for that.

Copyright © Guru Ghasidas.Org All Rights Reserved   Design By www.Coloradventures.com

you are visitor No